Namaaz Ke Tareeka namaaz padhane ke be shumaar fazail aur na padhane - hadees war Hindi 2019 Muslim Aaj Hadees in English hadhis

Namaaz Ke Tareeka namaaz padhane ke be shumaar fazail aur na padhane

नमाज़ का तरीका         Fazils and not read


namaaz ka tareeka 2019 2020
Namaaz Ke Tareeka  namaaz padhane ke be shumaar fazail aur na padhane

Post No 1]      اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ


    📖 क़ुरआन व हदिष में नमाज़ पढ़ने के बे शुमार फ़ज़ाइल और न पढ़ने की सख्त सजाए वारिद है, चुनान्चे पारह 28 सूरतुल मुनाफिकिन की आयत नंबर 9 में इरशादे रब्बानी है,

ऐ ईमान वालो ! तुम्हारे माल न तुम्हारी औलाद कोई चीज़ तुम्हे अल्लाह के ज़िक्र से गाफिल न करे और जो ऐसा करे तो वोही लोग नुक़सान में है।*
 
हज़रते सय्यिदुना इमाम मुहम्मद बिन अहमद ज़हबी अलैरहमा नक़ल करते है, मुफ़स्सिरीने किराम रहमतुल्लाह तआला फरमाते है की आयते मुबारका में अल्लाह तआला के ज़िक्र से पाँच नमाज़े मुराद है, पस जो शख्स अपने माल यानि खरीदो फरोख्त, मईशत व रोज़गार, साज़ो सामान और औलाद में मसरूफ़ रहे और वक़्त पर नमाज़ न पढ़े वो नुक़सान उठाने वालो में से है।


Post No 2]  


क़यामत का सब से पहला सुवाल

 सरकारे मदीना ﷺ का इर्शादे हक़ीक़त बुन्याद है, क़यामत के दिन बन्दे के आमाल में सबसे पहले नमाज़ का सुवाल होगा। अगर वो दुरुस्त हुई तो उसने कामयाबी पाई और अगर उसमे कमी हुई तो वो रुस्वा हुवा और उसने नुक़सान उठाया
(कन्जुल अम्माल, जी.7 स.115 हदिष:18883)

नमाज़ी के लिये नूर 

सरकारे दो आलम ﷺ का इरशादे गिरामी है, जो शख्स नमाज़ की हिफाज़त करे उसके लिये नमाज़ क़यामत के दिन नूर, दलील और नजात होगी और जो इसकी हिफाज़त न करे उस के लिये ब रोज़े क़यामत न नूर होगा और न दलील और न ही नजात। और वो शख्स क़यामत के दिन फिरौन, क़ारून, हमान और उबय बिन खलफ़् के साथ होगा।

Post No 3]  


किसका किसके साथ हशर होगा,

हज़रते मुहम्मद बिन अहमद ज़हबी अलैरहमा नक़ल करते है, बाज़ उलमए किराम रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है, नमाज़ के तारिक को इन 4 (फिरऔन, क़ारून, हामान ओर उबय बिन खलफ़्) के साथ इस लिये उठाया जाएगा की लोग उमुमन दौलत, हुकूमत, वज़ारत और तिजारत की वजह से नमाज़ को तर्क करते है।

  •     जो हुकूमत की मशगुलिययत के सबब नमाज़ नहीं पढेगा उसका हशर फिरऔन के साथ होगा। 
  •    जो दौलत के बाइस नमाज़ को तर्क करेगा तो उसका क़ारून के साथ हशर होगा। 
  •     अगर तर्के नमाज़ का सबब वज़ारत होगी तो फिरऔन के वज़ीर हामान के साथ हशर होगा। 
  •     अगर तिजारत की मसृफिय्यत की वजह से नमाज़ छोड़ेगा तो उस को मक्कए मुकर्रमा के बहुत बड़े काफ़िर ताजिर उबय बिन खलफ़् के साथ बरोज़े क़यामत उठाया जाएगा। 

Post No 4]  

शदीद ज़ख़्मी हालत में नमाज़*


  , जब हज़रते उमर फारुके आज़म رضي الله تعالي عنه पर क़ातिलाना हमला हुआ तो अर्ज़ की गई, ऐ अमीरुल मुअमिनीन ! नमाज़ का वक़्त है।
  •     फ़रमाया, जी हा, सुनिये ! जो शख्स नमाज़ को जाएअ करता है उसका इस्लाम में कोई हिस्सा नहीं। 
  •     और आप ने शदीद ज़ख़्मी होने के बा वुज़ूद नमाज़ अदा फ़रमाई। 

Post No 5]  

नमाज़ पर नूर या तारीकी के अस्बाब

     हज़रते उबादा बिन सामित رضي الله تعالي عنه से रिवायत हैं की हुज़ूर ﷺ का फरमाने आलिशान है, जो शख्स अच्छी तरह वुज़ू करे, फिर नमाज़ के लिये खड़ा हो, इसके रूकू, सुजूद और किरआत को मुकम्मल करे तो नमाज़ कहती है, अल्लाह तआला तेरी हिफाज़त करे जिस तरह तूने मेरी हिफाज़त की। फिर उस नमाज़ को आसमान की तरफ ले जाया जाता है और उस के लिये चमक और नूर होता है।

  •      पस उसके लिये आस्मां के दरवाज़े खोले जाते है हत्ता की उसे अल्लाह तआला की बारगाह में पेश किया जाता है और वो नमाज़ उस नमाज़ी की शफ़ाअत करती है,
  •      और अगर वो इस का रुकूअ, सुजूद और किरआत मुकम्मल न करे तो नमाज़ कहती है, अल्लाह तआला तुझे छोड़ दे जजस तरह तूने मुझे जाए किया। फिर उस नमाज़ को इस तरह आसमान की तरफ ले जाया जाता है की उस पर तारीकी छाई होती है और उस पर आसमान के दरवाज़े बंद कर दिये जाते है फिर उसको पुराने कपड़े की तरह लपेट कर उस नमाज़ी के मुह पर मारा जाता है। 

Post No 6.]  

बुरे खतिमे का एक सबब*

    🌴 हज़रते इमाम बुखारी अलैरहमा फरमाते है, हज़रते हुजैफा बिन यमान رضي الله تعالي عنه ने एक शख्स को देखा जो नमाज़ पढ़ते हुए रूकू और सुजूद पुरे अदा नहीं करता था। 

  •     तो उस से फ़रमाया : तुम ने जो नमाज़ पढ़ी अगर इसी नमाज़ की हालत में इन्तिकाल कर जाओ तो हज़रत मुहम्मद मुस्तफा के तरीके पर तुम्हारी मौत वाकेअ नहीं होगी।

(सहीह बुखारी, जी.1 स.112)*


    .सुनने नसाई की रिवायत में ये भी है की आप ने पूछा तुम कब से इस तरह नमाज़ पढ़ रहे हो ? उसने कहा 40 साल से, फ़रमाया : तुमने 40 साल से बिलकुल नमाज़ ही नहीं पढ़ी और अगर इसी हालत में तुम्हे मौत आ गई तो दिने मुहम्मदी पर नही मरोगे। 
.....?

                 .Post No 7.] 

          नमाज़ का चोर 

     हज़रते अबू क़तादा رضي الله تعالي عنه से रिवायत है की सरकारे मदीना ﷺ का फरमाने बा करीना है : लोगो में बद तरीन चोर वो है जो अपनी नमाज़ में चोरी करे।
 अर्ज़ की गई : या रसूलुल्लाह ﷺ ! नमाज़ का चोर कौन है ?फ़रमाया : वो जो नमाज़ के रूकू और सजदे पुरे न करे।
(मस्नद इमाम अहमद हम्बल, जी.8 स.386 हदिष : 22705)*

                    चोर की दो किस्मे_*

     हज़रते मुफ़्ती अहमद यार खा अलैरहमा इस हदिष के तहत फरमाते है : मालुम हुवा माल के चोर से नमाज़ का चोर बदतर है क्यू की माल का चोर अगर सज़ा भी पाता है तो कुछ न कुछ नफा भी उठा लेता है, मगर नमाज़ का चोर सज़ा पूरी पाएगा इसके लिये नफा की कोई सूरत नहीं।
    💵 माल का चोर बन्दे का हक़ मारता है, जब की नमाज़ का चोर अल्लाह का हक़, ये हालत उनकी है जो नमाज़ को नाकिस पढ़ते है इससे वो लोग दरसे इबरत हासिल करे जो सिरे से नमाज़ पढ़ते ही नही।



                    Post No 8.] 



    💧 बा वुज़ू किब्ला रु इस तरह खड़े हो की दोनों पाउ के पन्जो में 4 उंगल का फ़ासिला रहे और दोनों हाथ कानो तक ले जाइये की अंगूठे कान की लौ से छु जाए और उंगलिया न मिली हुई हो न खूब खुली बल्कि अपनी हालत पर (normal) रखे और हथेलिया किबले की तरफ हो नज़रे सज्दे की जगह हो। 
    अब नमाज़ पढ़ना है उस की निय्यत यानि दिल में उसका पक्का इरादा कीजिये साथ में ही ज़बान से भी कह लीजिये की ज्यादा अच्छा है। 
     अब तकबीरे तहरीमा यानि "अल्लाहु अकबर" कहते हुए हाथ निचे लाइये और नाफ़ के निचे इस तरह बंधिये की सीधी हथेली की गद्दी उलटी हथेली के सिरे पर और बिच की 3 उंगलिया उलटी कलाई की पीठ पर और अंगूठा और छोटी ऊँगली कलाई के अगल बगल हो।

                      Post No 9.] 



अब सना पढ़िये, फिर तअव्वुज़ पढ़िये : "अउजुबिल्लाहि मिनशैतानी रज़िम"
(में अल्लाह तआला की पनाह में आता हु शैतान मरदूद से)
  •    फिर तस्मिया पढ़िये
"बीसमील्लाही-र्रहमा निर्रहीम"
(अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत महेरबान रहमत वाला)

  •     फिर सूरए फातिहा पढ़िये
सूरए फातिहा खत्म करके आहिस्ता से आमीन कहिये।

  •     फिर 3 आयात या एक बड़ी आयत जो 3 छोटी आयतो के बराबर हो या कोई सूरत मसलन सूरए इखलास पढ़िये।

  •     अब "अल्लाहु अकबर" कहते हुए रुकूअ में जाइये। 


                       Post No 10.] 



मर्द :,,"
          रुकूअ में घुटनो को इस तरह हाथ से पकड़िये की हथेलिया घुटनो पर और उंगलिया अच्छी तरह फैली हुई हो। 
  •      पीठ बिछी हुई और सर पीठ की सीध में हो, उचा निचा न हो, और नज़र क़दमो पर हो।

*⬇⬇औरत :
  •      रुकूअ में थोडा झुकिये यानि इतना की घुटनो पर हाथ रख दे ज़ोर न दीजिये और घुटनो को न पकड़िये और उंगलिया मिली हुई और पाउ झुके हुए रखिये मर्दों की तरह सीधे मत रखिये। 

  •      कम अज़ कम 3 बार रुकूअ की तस्बीह यानि "सुब्हान-रब्बियल-अज़ीम" (यानि पाक हे मेरा अज़मत वाला परवर दगार) कहिये। 
  •      फिर तस्मिअ यानि "समी-अल्लाहु-लीमन-हमीदह" (यानि अल्लाह ने उसकी सुनली जिसने उसकी तारीफ़ की) कहते हुए बिलकुल सीधे खड़े हो जाइये,

  •     इस खड़े होने को क़ौमा कहते है। अगर आप अकेले नमाज़ पढ़ रहे है तो इसके बाद "रब्बना-व-लकल-हम्द" या "अल्लाहुम्म-रब्बना-व-लकल-हम्द" (यानि ऐ अल्लाह ! सब खुबिया तेरे लिये है) कहिये

     फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे में जाए। 
             

                       Post No 11.] 

    सज्दे में जाते वक़्त पहले घुटने ज़मीन पर रखिये फिर दोनों हाथो के बिच में इस तरह सर रखिये की पहले नाक फिर पेशानी और ये ख़ास ख्याल रखिये की नाक की नोक नही बल्कि हड्डी लगे और पेशानी ज़मीन पर जम जाए, नज़र नाक पर रहे


..मर्द :,,
  •     बाजुओ को करवटों से, पेट को रानो से और रनों को पिंडलियों से जुदा रखिये। (अगर सफ में हो तो बाज़ू करवटों से लगाए रखिये)
  •  दोनों पाउ की दसो उंगलियो का रुख इस तरह किब्ले की तरफ रहे की दसो उंगलियो के पेट ज़मीन पर लगे रहे। 

  •  हथेलिया बिछी रहे और उंगलिया किब्ला रु रहे मगर कलाइयां ज़मीन से लगी हुई मत रखिये। 

औरत :⬇⬇⬇⬇
     सज्दा सिमट कर कीजिये यानि बाजु करवटों से, पेट को रानो से और रनों को पिंडलियों से और पिंडलियां ज़मीन से मिला दीजिये। और दोनों पाउ सीधी तरफ निकाल दीजिये। 

  • अब कम अज़ कम 3 बार "सुब्हान रब्बियल अअ'ला" पढ़िये।

  •  फिर इस तरह उठिये की पहले पेशानी फिर नाक फिर हाथ उठे। 


                      Post No 12.] 




सज्दे से इस तरह उठिये की पहले पेशानी फिर नाक फिर हाथ उठे। 

*🌴 मर्द : 🌴*
  •      फिर सीधा कदम खड़ा करके उसकी उंगलिया किब्ला रुख कर दीजिये और उल्टा क़दम बिछा कर उस पर खूब सीधे बेथ जाइये और हथेलिया बिछा कर रानो पर घुटनो के पास रखिये की दोनों हाथो की उंगलिया किब्ले की जानिब और उंगलियो के सिरे घुटनो के पास हो।

औरत :
     दोनों पाउ सीधी तरफ निकाल दीजिये और उलटी सुरीन पर बैठिये और सीधा हाथ सीधी रान के बिच में और उल्टा हाथ उलटी रान रान के बिच में रखिये। 

  •     दोनों सजदों के दरमियान बैठने को जल्सा कहते है।
  •      फिर कम अज़ कम एक बार सुब्हान अल्लाह कहने की मिक़दार ठहरिये 

  •      यहा "अल्लाहुमग-फिरलि" (यानि ए अल्लाह मेरी मगफिरत फरमा) पढ़ना मुस्तहब है
  •     फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए पहले सज्दे की तरह दूसरा सज्दा कीजिये।

                   Post No 13.] 




दूसरे सज्दे से खड़े होते हुए पहले सर उठाइए फिर हाथो को घुटनो पर रख कर पन्जो के बल खड़े हो जाइये।उठते वक़्त बिगैर मजबूरी ज़मीन पर हाथ से टेक मत लगाइये। 
  •      ये आप की एक रकअत पूरी हुई। 

     अब दूसरी रकअत में "बिस्मिल्लाह" पढ़ कर अल हम्द और सूरह पढ़िये और पहले की तरह रुकूअ और सज्दे कीजिये, 

☘ मर्द :
  •      दूसरे सज्दे से सर उठाने के बाद सीधा क़दम खड़ा कर के उल्टा क़दम बिछा कर बैठ जाइये 

,,औरत :
  •      दूसरे सज्दे से सर उठाने के बाद दोनों पाउ सीधी तरफ निकाल दीजिये और उल्टी सुरीन पर बैठिये और सीधा हाथ सीधी रान के बिच में और उल्टा हाथ उल्टी रान के बिच में रखिये। 

  •      दो रकअत के दूसरे सज्दे के बाद बैठना कादह कहलाता है, अब कादह में तशह्हुद (अत्तहिय्यात) पढ़िये।

                       Post No 14.] 



क़ादह में तशह्हुद में "अशहदू अंल्ला-इलाह" के लाम के करीब पहुचे तो सीधे हाथ की बिच की ऊँगली और अंगूठे का हल्का बना लीजिये और छुंगलिया (छोटी ऊँगली) और बिन्सर यानि उसके बराबर वाली ऊँगली को हथेली से मिला दीजिये और कलिमे की ऊँगली उठाइये।

    🍁 मगर इसको इधर उधर मत हिलाये और "इला" पर ऊँगली गिरा दीजिये और फौरन सब उंगलिया सीधी कर लीजिये।

    ,अब अगर दो से ज्यादा रकअते पढ़नी है तो "अल्लाहु अकबर" कहते हुए खड़े हो जाइये।

    . अगर फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ रहे है तो तीसरी और चौथी रकअत में क़याम में "बिस्मिल्लाह और अल्हम्दु शरीफ पढ़िये, सूरत मिलाने की ज़रूरत नहीं।


                   Post No 15.] 



फिर 4 रकअते पूरी करके कादए आखिरह में तशह्हुद के बाद दुरुदे इब्राहिम पढ़िये, फिर दुआए मासुरा पढ़िये

     फिर नमाज़ खत्म करने के लिये पहले दाए कन्धे की तरफ मुह कर के "अस्सलामु अलैक वरहमतुल्लाह" कहिये और इसी तरह बाई तरफ। 
अब नमाज़ खत्म हुई।

     इस्लामी भइयो और बहनो के दिये हुए इस तरीकए नमाज़ में बाज़ बाते फ़र्ज़ है की इसके बगैर नमाज़ होगी ही नही,
    बाज़ बाते वाजिब की इस का जानबूझ कर छोड़ना गुनाह और तौबा करना और नमाज़ का फिर से पढ़ना वाजिब, और भूल कर छूटने से सज्दए सहव वाजिब
     और बाज़ सुन्नते मुअक्कदा है की जिस के छोड़ने की आदत बना लेना गुनाह है और
     बाज़ मुस्तहब है की जिस का करना सवाब और न करना गुनाह नही। 
 बहारे शरीअत, ही.3 स.66*
(नमाज़ के अहकाम, सफा: 154,155)*

पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह.,,,,,....


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