औरत को अपने शौहर का नाम लेकर पुकारना कैसा hee जवाब दियाहै - hadees war Hindi 2019 Muslim Aaj Hadees in English hadhis

औरत को अपने शौहर का नाम लेकर पुकारना कैसा hee जवाब दियाहै


औरत को अपने शौहर का नाम लेकर पुकारना कैसा?


सवाल जवाब, पोस्ट [1].

܀܀

  🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*

* सवाल :-* औरत को अपने शौहर का नाम लेकर पुकारना कैसा?

*जवाब :-* औरत को अपने शौहर का नाम लेकर पुकारना जायज़ तो है लेकिन खिलाफे अदब है, मर्द को अपने बीवी का नाम लेकर पुकारना या औरत को अपने शौहर का नाम लेकर पुकारना खिलाफे अदब है बल्कि प्यार से बुलाऐं ताकि दोनों के दरमियान मोहब्बत ज़्यादा हो।

सवाल :-* औरतों को कौन कौन सी चूडियाँ पहनना जायज़ है और कौन कौन सी चूडियाँ पहनना नाजायज़ है,हज़रत हवाले के साथ बताना मुझे किसी को बताना है?

* जवाब :-* फतावा फिक्ह मिल्लत में है कि कांच यानि शीशा और प्लास्टिक की चूडियाँ पहनना और पहन कर नमाज़ पढ़ना सह़ी वह दुरुस्त है,,,फतावा रज़विया में है,आला हज़रत से सवाल किया गया,कि औरतों को कांच की चूडियाँ पहनना जायज़ है या नहीं,आपने जवाब फरमाया,जायज़ है बल्कि शौहर के लिए सिंगार की नियत से मुस्तहब है,और शौहर या माँ बाप का हुक्म हो तो वाजिब,,सोना चांदी और कांच यानि शीशा और पिलास्टिक की जायज़ है,और लोहा तांबा पीतल रांगा वगैरह औरतों के लिए नाजायज़ वह हराम है,रद्दुल मुख्तार में है।
*फतावा फिक्ह मिल्लत जिल्द 1 सफह 177*
*फतावा रज़विया जिल्द,9 सफह 235*
*रद्दुल मुख्तार जिल्द 5 सफह 253*

 सवाल :-* अस्सलामु आलैकुम,किया फरमाते है उलमा ए कराम कि जैद मन्दिर में जाकर भजन गाता और गवाता है सूद ब्याज़ खुलेआम लेता है शराब खुलेआम पीता है जुंवां खुलेआम खेलता है,इसके बारे में क़ुरआन हदीस की रौशनी में जवाब इनायत करें महरबानी होगी?

जवाब :-* वालैकुम अस्सलाम,ज़ैद अगर वाक़ई ऐसा करता है जैसा सवाल में ज़िक्र किया गया तो जैद इस्लाम से खारिज़ हो गया,यानि काफिर हो गया,तौबा वह तजदीदे ईमान वह तजदीदे निकाह लाज़िम है,मुफ्ती शरीफुल हक़ अमजदी फतावा शारह बुखारी में इसी तरह के एक सवाल के जवाब में फरमाते है,जो शख्स हिन्दुओं के पूजा के गीत और भजन में शरीक़ होता है वह मुसलमान नहीं वह इस्लाम से निकल गया उसकी बीवी उसके निकाह से निकल गयी।
फतावा शारह बुखारी,जिल्द,2 सफह 617




 sawal jawab [2]

सवाल :-* हमारे गाँव में एक इमाम साहब हैं जब तक यहाँ रहते हैं पांचो टाइम नमाज़ पढ़ते पढ़ाते हैं पर जब अपने घर जाते एक वक्त भी नमाज़ नहीं पढ़ते,ना घर पर और ना ही मस्जिद जाते हैं,अब ऐसे इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ना कैसा है।

*♼☞ जवाब :-* जैद अगर वाक़ई में एसा है जैसा सवाल में ज़िक्र किया गया है,ज़ैद अगर बे अमल है तो हक़ीक़त में वह आलिम नहीं जाहिल के मिस्ल है,बल्कि जाहिल है और जब वह मस्जिद में नमाज़ पढ़ने नहीं जाता है तो तर्के जमाअत का आदी है,तो फासिक़ है और अपने घर में भी नमाज़ नहीं पढ़ता तो शदीद तरीन फासिक़ है उसके पीछे नमाज़ पढ़ना भी जायज़ नहीं है,बहरहाल ऐसा शख्स नायेबे रसूल और वारिसे अम्बिया हरगिज़ नहीं हो सकता जो नायेबे रसूल और वारिसे अम्बिया होगा वह बे अमल नही होगा।
फतावा फिक़्ह मिल्लत,जिल्द 1 सफह 132, 133*

♽☞ सवाल :-* एक साहब की बीवी सउदी अरब में,है और उनका शौहर गाँव में अब अगर फोन पर तलाक़ दें तो हो जायेगी?

♼☞ जवाब :-* मोबाइल फोन, खत, e-mail,के ज़रिए तलाक़ देने से भी तलाक़ पड़ जाती है,जबकि शौहर खुद कहे की मैंने तलाक़ दी।
फतावा रज़ा दारुल यतामा,सफह 245/251*
मोबाईल फोन के ज़रुरी मसाऐल सफह,130,

♽ सवाल :-* क़ारी साहब आपसे एक सवाल पुछना है कि किया हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का कम्बल ओढ़ना साबित है या नहीं?

 जवाब :-* हदीस शरीफ से साबित है।
मलफूज़ात,इमाम अहमद रज़ा,सफह 215*

सवाल :-* औरत ह़मल से है और उसका शौहर उसको तलाक़ दे दिया अब हमारे यहाँ कुछ लोग कहते हैं कि हमल में तलाक़ नहीं माना जाता है और कुछ लोग कहते हैं हो जायेगा,अब आप बतायें तलाक़ होगा या नहीं और अगर हवाला मिल जाए तो ज्यादा बेहतर होगा?.

 जवाब :-* ह़ालते ह़मल में तलाक ना दी जाए पर अगर किसी ने दे दिया तो तलाक़ हो जायेगी।
अहकामे शरीअत हिस्सा,2 सफह 166.

 सवाल :-* अस्लामु आलैकुम,हज़रत मेरा एक सवाल है कि बालों में काली मेंहदी लगाना कैसा है?

 जवाब :-* बालों में काली मेंहदी लगाना मर्द वह औरत दोनों के लिए नाजायज़ वह हराम और गुनाह है।
मुस्लिम शरीफ जिल्द,2 सफह 199
फतावा रज़विया जिल्द,9 सफह 32

 sawal jawab [3]

सवाल :-* खिलाफते राशिदा किसकी खिलाफत को कहते हैं?

जवाब :-* हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु,ह़ज़रते उमर फारूक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु,ह़ज़रते उसमाने गनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ह़ज़रते मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु,वह इमाम हसन मुजतबा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु,की खिलाफत को खिलाफते राशिदा कहा जाता है और उसके बाद बादशाहत शुरू हुई,मगर ह़ज़रते अमीर मुआविया रज़ियल्लाहु तआला अन्हु,और पहली सदी हिज्री के मुजद्दिद ह़ज़रते उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु,वह आखिर ज़माने में ह़ज़रते इमाम मेंहदी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की खिलाफत खिलाफते राशिदा में शामिल है
अलमलफूज़ हिस्सा,3 सफह 65*

♽ सवाल :-* खुतबे की आज़ान मस्जिद से बाहर होनी चाहिए या अन्दर?

जवाब :-* हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम और तमाम खुलफाऐ राशिदीन के ज़माने में आज़ाने सानि मस्जिद के दरवाज़े पर थी हां ईमाम का सामना होना चाहिए लेकिन अगर सामना नहीं होता हो यानि खम्भा वगैरह लगा हो तो ईमाम के सामने होना ज़रुरी नहीं,मगर मस्जिद के बाहर होना ज़यादा बेहतर है
 अहकामें शरीअत हिस्सा 2, सफह 207*

♽☞ सवाल :-* हमारे यहाँ एक इमाम साहब हैं,उनका घर मस्जिद के बगल में ही है,इमाम साहब सिर्फ जुमें की नमाज़ पढ़ाते हैं,जुमां के अलावा दूसरी नमाज़ें इमाम साहब का साहबज़ादा जो हाफिज है वह पढ़ाता है,इमाम साहब जुमां के अलावा दीगर नमाज़ें बा जमाअत पढ़ने का एहतिमाम नहीं करते कई दफा देखा गया है कि मस्जिद में आज़ान हो रही होती है और इमाम साहब घर में मौजूद होते हुए भी मस्जिद में नहीं आते,कभी कभी घर के बाहर बैठे सीगरेट पी रहे होते और मस्जिद नहीं जाते और वह काला खिज़ाब डाई भी लगवाते है अब इमाम साहब के पीछे जुमां की नमाज़ या दीगर नमाज़ें पढ़ना कैसा?

*जवाब :-* जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ना वाजिब है और बिला उज्र शरई जमाअत का छोड़ना फिस्क़ है इसी तरह काला खिज़ाब लागाना भी मकरूहे तह़रीमी और गुनाह है और इस गुनाह को तकरार से करना फिस्क़ है,और फिक़्ह की हर किताब में है कि फासिक़ की इमामत मकरूहे तह़रीमी है,अगर लोगों ने अपने इख़्तियार से फासिक़ को इमाम बनाया तो वह भी गुनहगार होंगे,लिहाज़ा ऐसे आदमी को इमाम बनाना और इसके पीछे जुमां या दीगर नमाज़ें पढ़ना जायज़ नहीं,हाँ अगर ऐलानियां तौबा कर ले और दूबारा वह गुनाह ना करे तो इमाम बना सकते हैं और उसके पीछे नामाज़ भी पढ़ सकते हैं कोई हरज नहीं।
फतावा भक्खी शरीफ जिल्द 1 सफह 170*

sawal jawab [4]..

सवाल :-* बाज़ लोग ईशा में फर्ज़ की 4 रकाअत, 2 सुन्नतें मुअक़क़िदा ,और, 3 वित्र, ही पढ़ते हैं ,ऐसा कियों ?

 जवाब :-* नमाज़ पूरी पढ़नी चाहिए मगर सुन्नते गैर मुअक्किदा मिस्ल नफ्ल है,और नफ्ल की पकड़ नहीं यानि करे तो सवाब और ना करे तो कोई गुनाह नहीं।

सवाल :-* औरत अगर ह़ालते हैज़ में हो तो उसके साथ कैसा बरताऊ रखा जाये, और किया शौहर अपनी बीवी से कुछ महीनों या कुछ साल दूर रहे तो निकाह टूट जाता है,दोनों का जवाब दें बड़ी महरबानी होगी?

जवाब :-* ह़ालते हैज़ में औरत से सिर्फ सोहबत ह़राम है बाकी सारे मुआमलात वैसे ही रखें यहाँ तक की अगर शहवत का अन्देशा ना हो तो हैज़ की ह़ालत में बीवी के साथ सोने में भी हरज नहीं हां शोहवत भड़कने का खतरा हो तो अलग सोऐं मगर वह अछूत भी नहीं हो जाती,यहाँ तक की अगर फातिहा वगैरह का खाना बनाना चाहे तो बिलकुल बना सकती है कोई हरज नहीं,और रही बात दूर रहने से निकाह टूटने की तो साल महीने 6 महीने किया अगर दोनों एक दूसरे को मियां बीवी मानते हैं तो निकाह के बाद दुबारा सारी ज़िन्दगी ना मिले फिर भी वह उसी के निकाह में रहेगी।
बहारे शरीअत हिस्सा,2 सफह 79*
📕फतावा मुस्तफवीया जिल्द 3 सफह 13*

 सवाल :-* खाने के बाद हाथ पोछने के लिए,Tisue paper,इस्तेमाल करना कैसा है?

 जवाब :-* मना है।
फतावा अफज़लुल मदारिस सफह 155*

पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह',,...,'



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